बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती पर संगोष्ठी के साथ निकाली गई भव्य शोभा यात्रा
(रिपोर्ट - मदन मोहन/नौगढ़/चंदौली)
नौगढ क्षेत्र के विभिन्न गांव में परम आदरणीय बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। इस कार्यक्रम में आज दिनांक 14 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय से गाजे बाजे के साथ रैली का शुभारंभ किया गया इस रेडी का शुभारंभ मुख्यतः दो स्थानों से संचालित की गई प्रथम जनकपुर क्षेत्र से तिवारीपुर, सोनवार, पिपराही विशेश्वरपुर मझगांवा होते हुए जनकपुर में मैं संगोष्ठी के रूप में तब्दील हुई इस शोभायात्रा का उद्घाटन भावी जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी सेक्टर नंबर 2 राम जीवन सिंह यादव एडवोकेट के द्वारा किया गया तथा संगोष्ठी में भी अपने विचारों को दूसरी रैली तेंदुआ पर से शुरू होकर अमदहा चरणपुर से होते हुए विभिन्न गांव जैसे मरवटिया, डुमरिया ललतापुर बसौली हनुमानपुर देवरा नर्मदा पुर मझगवां ठटवां नर्मदा पर होते हुए अतरवा बोझ,औराही पिपराही होते हुए जनकपुर में संगोष्ठी में तब्दील हुई इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष रामचंद्र राम,, राजमणि राव अवधेश कुमार के देखरेख में किया गया इस जुलूस में करीब 500 से अधिक लोगों ने बढ़ चढ़कर सालिया तथा उत्साह के साथ बाबा साहब के नारे लगाते हुए चित्र भ्रमण किया इस जुलूस में प्रशासन की अहम भूमिका रही सुबह से लेकर शाम तक जुलूस के आगे प्रशासन की गाड़ी वह पीछे पुलिस प्रशासन सक्रिय रूप से चलाया मान थी जिसे रैली जुलूस में कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो सके इस कार्यक्रम मेंबाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और उनके विचार आधुनिक भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। उन्होंने न केवल दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज का खाका भी खींचा।
उनके प्रमुख विचार, संदेश और नारों का विवरण . प्रमुख संदेश और विचार पर चर्चा करते हुए कहा कि
डॉ. अंबेडकर के विचार केवल राजनीति तक सीमित नहीं थे, वे सामाजिक सुधार और मानवीय गरिमा पर केंद्रित थे:
*शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो:** यह उनका सबसे प्रभावशाली संदेश था। उनका मानना था कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वह दहाड़ेगा। बिना शिक्षा के मानसिक गुलामी से मुक्ति संभव नहीं है।
सामाजिक न्याय और समानता: बाबा साहेब का मानना था कि "समानता" के बिना स्वतंत्रता अधूरी है। उन्होंने जाति प्रथा को "श्रम का विभाजन नहीं, बल्कि श्रमिकों का विभाजन" माना था।
संवैधानिक नैतिकता:** वे चाहते थे कि लोग केवल कानूनों का पालन न करें, बल्कि लोकतंत्र की भावना को अपने भीतर उतारें। उनके लिए लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं, बल्कि मूलतः साथ रहने का एक दृष्टिकोण है।
महिलाओं के अधिकार:** उनका प्रसिद्ध कथन था, मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस प्रगति के स्तर से मापता हूँ जो वहां की महिलाओं ने हासिल की है।"** उन्होंने हिंदू कोड बिल के जरिए महिलाओं को संपत्ति और स्वाधीनता के अधिकार दिलाने की वकालत की।प्रसिद्ध नारे
डॉ. अंबेडकर ने समाज में चेतना जगाने के लिए कई सशक्त नारे दिए:
* **"जय भीम!"** (यह आज उनके अनुयायियों के बीच एकता और सम्मान का प्रतीक बन चुका है)।
शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।
छीने हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करने पड़ते हैं।"जीवन का उद्देश्य| "जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।" |
मैं सबसे पहले और अंत में भी भारतीय हूँ।" |
बाबा साहेब का संदेश स्पष्ट था: बौद्धिक स्वतंत्रता*और आत्म-सम्मान उन्होंने सिखाया कि अन्याय को सहना उतना ही गलत है जितना अन्याय करना। उनके विचार आज भी हमें एक बेहतर और निष्पक्ष समाज बनाने की प्रेरणा देते हैं। इस रैली में मुख्य रूप से शशान्त , सुभाष राम सूरत विजय भास्कर राजमणि राज, लाल बहादुर रिंकू यादव ग्राम प्रधान परमानंद यादव अभिमन्यु प्रजापति सुरेश कुमार प्रेमनाथ, जिला जीत यादव मनोज यादव राजकुमार , सहित सैकड़ो लोगो उपस्थित रहे प्रशासन की ओर से चौकी इंचार्ज मझगावा देवेंद्र बहादुर सिंह, हंसराज मिश्रा अमदहा,राजेश कुमार सिंह अशोक कुमार रामचंद्र भारती सुरक्षा व्यवस्था में लग रहे साथी कार्यक्रम सब कुशल संपन्न हो गया।





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